1. पोषण एवं खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम
नवसृजन विकास संवाद समिति का "पोषण एवं खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम" ग्रामीण परिवारों को कुपोषण, खाद्य असुरक्षा और कृषि पर बढ़ती निर्भरता की चुनौतियों से उबारने के लिए एक समग्र और टिकाऊ पहल है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रत्येक परिवार को वर्ष भर विविध, पौष्टिक और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना तथा स्थानीय संसाधनों पर आधारित सतत कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देना है। हमारा विश्वास है कि जब प्रत्येक परिवार के पास अपनी पोषण वाटिका, अपना बीज बैंक और अपनी जैविक खेती की व्यवस्था होगी, तब "हर घर पोषण, हर महिला आत्मनिर्भर" का सपना साकार होगा।
Permagarden (पोषण वाटिका)
परिवारों को अपने घर के आसपास उपलब्ध छोटे से भू-भाग में वर्ष भर सब्जियां, फल, औषधीय पौधे और पोषणयुक्त फसलें उगाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। यह मॉडल कम पानी, सीमित संसाधनों और जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों में भी सफलतापूर्वक कार्य करता है।
सामुदायिक बीज बैंक (Seed Bank)
स्थानीय एवं पारंपरिक बीजों का संरक्षण, आदान-प्रदान और उपलब्धता सुनिश्चित करना, जिससे किसानों की बाहरी बाजारों पर निर्भरता कम हो और स्थानीय जैव विविधता सुरक्षित रहे।
खाद निर्माण (Composting) व जैविक उपाय
जैविक अवशेषों से कम्पोस्ट खाद बनाने, जीवामृत, और घनजीवामृत के उपयोग का प्रशिक्षण, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और कृषि लागत कम होती है।
पोषण शिक्षा (Nutrition Education)
महिलाओं, किशोरियों और बच्चों को संतुलित आहार, स्वच्छता और भोजन की विविधता के महत्व के बारे में जागरूक करना।